शिव तत्व का रहस्य

शिव तत्व रहस्य? ?️?️?️?️?️?️?️ ॐ परमात्मने नमः परम् आनन्द और सौभाग्य प्राप्ति के लिए ईश्वरीय रहस्य को जानना अति आवश्यक है। भगवान शिव को बिल्वपत्र अधिक क्यों प्रिय है तथा इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है? ?️ आइये आज हम इस रहस्य को भी जानते हैं। ?️?️?️?️?️?️ स्कन्द पुराण के अनुसार मंदराचल पर्वत पर माँ पार्वती के पसीने की एक बूंद गिरने से बिल्वपत्र का व्रक्ष उतपन्न हुआ इसमे माता पार्वती का सूक्ष्म शरीर प्रवेश कर गया जिस कारण से बिल्वपत्र को माता पार्वती का अंश माना जाने लगा। भगवान शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने उसी बिल्वपत्र के नीचे बैठकर कठिन तपस्या करी और भगवान शिव को प्राप्त कर लिया। इस व्रक्ष पर माता लक्ष्मी का भी वास माना जाता है। परमात्मा की अनुभूति दो रूपों में है साकार और निराकार अर्थात सगुण और निर्गुण । माता पार्वती ने भगवान के दोनों रूपों को एकाकार किया है।भगवान शिव ने भी माता पार्वती की सूक्ष्म गहराई में प्रवेश कर उन्हें साकार और निराकार दोनो रूप में स्वीकार किया। यही भगवान का अर्धनारीश्वर स्वरूप है। जो इस बात का गहरा सन्देश देता है कि सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए पति-पत्नी दोनों को तन अर्थात साकार रूप और मन अर्थात निराकार रूप से एकाकार होना पड़ेगा। तन से अधिक मन का मिलन ही सुखी जीवन का सूत्र है। समुद्र मंथन के समय निकलने वाले विष को पीने से भगवान शंकर को गहरी जलन और पीड़ा हुई तब देवताओं ने उसी बेलपत्र रूपी औषधि और जल से विष की जलन को शान्त कर दिया। अर्थात पार्वती जी की तपस्या से गिरी एक बूंद बिल्वपत्र की औषधि के रूप में शिव जी के लिए संजीवनी बन गयी। बिल्वपत्र वास्तव में वो संजीवनी है जो समस्त दुःखों का निवारण करती है इसकी तीन पत्तियां भगवान के तीन नेत्रों का पर्याय हैं। ये तीन पत्तियां इस बात का प्रतीक हैं कि भगवान की उपासना तीनो मार्ग ज्ञान मार्ग,ध्यान मार्ग और भक्ति मार्ग से की जा सकती है। बिल्वपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है। बिल्वपत्र की तीन पत्तियां क्रमशः ब्रह्मा-विष्णु और महेश तीन देवों तथा माता पार्वती का अंश और लक्ष्मी जी छाया से परिपूर्ण होकर पत्र के रूप में ब्रह्म का प्रतीक है। त्रिजन्मपाप संहारं बिल्वपत्रम शिवार्पणम्" ॥ ।।ॐ नमः शिवाय।। यही बिल्वपत्र का आध्यात्मिक महत्व है। ?️?️?️?️?️?️ आचार्य राहुल अस्थाना ज्योतिषाचार्य व आध्यात्मिक मर्मज्ञ