प्रथम भाव और उसका हमारे जीवन पर प्रभाव
? पहला भाव (लग्न) – "मैं कौन हूँ?"
एस्ट्रो दीपक शर्मा की कहानी शुरू होती है लग्न भाव से।
लग्न भाव जीवन का आईना है – शरीर, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास।
1️⃣ भाव पीड़ित
एस्ट्रो दीपक शर्मा का लग्न भाव राहु-शनि से पीड़ित हो गया।
? इसका असर यह हुआ कि स्वास्थ्य बार-बार बिगड़ने लगा।
कभी बुखार, कभी सिरदर्द, कभी आत्मविश्वास की कमी।
दीपक भाई ने समझा –
जब लग्न भाव पीड़ित होता है, तो शरीर और आत्मबल पर समस्या आती है।
2️⃣ भावेश पीड़ित
अब मान लीजिए लग्न का स्वामी (भावेश) मंगल है, और वह छठे भाव में बैठकर शनि से पीड़ित हो गया।
? अब क्या हुआ?
एस्ट्रो दीपक शर्मा को कामयाबी तो मिली, पर बहुत संघर्ष और विरोध झेलकर।
कभी लोग रास्ते में रोड़ा अटकाते, कभी मेहनत से हासिल की चीज़ देर से हाथ लगती।
एस्ट्रो दीपक शर्मा ने समझा –
जब लग्नेश पीड़ित होता है, तो व्यक्ति अपनी पहचान और सफलता कठिनाई से प्राप्त करता है।
3️⃣ कारक पीड़ित
लग्न का कारक – सूर्य।
अब सोचिए सूर्य ही कमजोर हो गया या राहु से पीड़ित हो गया।
? परिणाम क्या हुआ?
दीपक भाई को इज्ज़त और मान-सम्मान तो मिला, लेकिन दिल से संतोष और गौरव का सुख अधूरा रहा।
भीड़ में खड़े होकर भी उन्हें लगता, “लोग मुझे पूरा नहीं पहचानते।”
एस्ट्रो दीपक शर्मा ने समझा
जब कारक ग्रह पीड़ित होता है, तो आत्मसुख और मान-सम्मान अधूरा रह जाता है।
✨ निष्कर्ष
एस्ट्रो दीपक शर्मा ने पहले भाव से यह सीख ली –
भाव पीड़ित → शरीर और आत्मविश्वास में समस्या।
भावेश पीड़ित → पहचान और उपलब्धि कठिनाई से।
कारक पीड़ित → मान-सम्मान का सुख अधूरा।
इस तरीके से हम जान चुके हैं कि हमारे प्रथम भाव का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव होता है ।