दशा फल निकलने के तीन स्टेप
नमस्कार ?
आज मैं बात करूंगा दशा फलित के सूत्र पर ✍️
दशा फलित के लिए हमें तीन बातो पर ध्यान रखना होता है ।
१- ग्रह स्थिति भाव
२- ग्रह स्वामित्व भाव
३- ग्रह दृष्टि व युति से निर्मित योग
फलित ?
सबसे पहले ग्रह को देखें वह किस भाव में स्थित है और किन भाव का स्वामी बना है। कौन से योग निर्मित कर रहा है । जिसका दशांतर दशा चल रहा हैं।
note ? ग्रह जीस् भाव में बैठा होगा उस प्रकार के फल प्राप्त होंगे । ग्रह ,एवं उसके स्वामित्व वाले भाव संबंधीत
जो ग्रह 3th ,11th भाव में स्थित ( संघर्ष )
6th, 8th, 12th भाव में स्थित ( दुख दर्द परेशानी )
यदि 5th, 9th भाव में स्थित हो तो ( वृद्धि ? )
1th, 4th, 7th, 10th, में हो तो ( सामान्य फल )
याद रहे ?
? ग्रह जिस भावों का स्वामी होकर जीस प्रकार के भावों में मौजूद होगा । उसी प्रकार का फल भाव स्वामित्व् एवं गृह से जुड़ा प्राप्त होगा।
उदाहरण अनुसार चंद्रमा पंचम भाव का स्वामी होकर 6थ् भाव में बैठा है।
फल - चंद्रमा के कारक तत्व एवं पंचम भाव के कारक् तत्व को लेकर चंद्रमा की दशा में संघर्ष रहेगा। एवं माता एवं संतान को कष्ट रहेगा या इनके द्वारा आपको कष्ट रहेगा ।
? इसके आलावा आप कारक मारक् के आधार पर देखे चंद्र देव रोग ,कर्ज ,शत्रु भाव में वेठ कर 12थ् भाव
को देखेगा। तो वहा वृद्धि करेगा।
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